Friday, January 31, 2025

यीशु मसीह के पुनरूत्थान के द्वारा विजय और सामर्थ

 

यीशु  मसीह के पुनरूत्थान के द्वारा विजय और सामर्थ

1कुरिन्थियो 15ः1-7,

यीशु  मसीह का पुनरूत्थान बाईबल कि सच्ची घटना है,चाहे लोग विष्वास करे या ना करे,कोई माने या ना माने यह सच्चाई है कि यीषु मसीह मरा,दफनाया गया,मरो मे से जी उठा,वह स्वर्ग गया और वह वापस आने वाला है,यह बाते हर एक विष्वासी जाने और उस के जी उठने के उद्वेष्य के बातो पर विष्वास करना चाहिए,ताकि आप यीषु मसीह के पुनरूत्थान के सामर्थ और विजय को अपने जीवन मे पा सके,

यीषु मसीह का जी उठना बाईबल सिखाता है कि वह इतना षक्तिषाली है जो सभी लोगो के लिए सुसमाचार पर विष्वास करने के द्वारा पापो से आजादी और महान विजय प्रदान करता है,यह चेलो के लिए षुभ सदेष था,यह विष्वासियो के लिए षुभ संेदष है यह आपके लिए षुभसदंेष है 

और जैस आप इस सन्देश को पढते है और प्रार्थना करते है तो यह  सन्देश आपके जीवन के सभी क्षेत्र सामर्थ और विजय लाऐगा,

इसलिए आज के विषय  सही से समझने के लिए हम तीन भागो मे बाटेगे,

1. यीशु मसीह के जी उठने का उद्वेष्य

2. यीशु मसीह के जी उठने का लाभ

3. यीशु के जी उठने के द्वारा सामर्थ और विजय का आन्नद प्राप्त करना


1. यीशु  मसीह के जी उठने का उद्वेष्य

1कुरिन्थियुस 15ः12-25,

यीशु मसीह का जी उठना बहुत ही महत्वपुर्ण है यदि यीषु मसीह जी नही उठता तो हमारा और आपका विश्वास  करना व्यर्थ होता और हमारा प्रचार व्यर्थ ठहरता,इसलिए पौलुस कहता है 1कुरिन्थियो 15ः14

लेकिन धन्यवाद परमेष्वर कि यीषु मसीह को मरो मे से जिलाया,इस कारण हमारा प्रचार व्यथ नही है

इस कारण आपका विश्वास  व्यर्थ नही है,आप सभी पापो से आजाद होते है,और आप कभी नाश  नही होगे हाल्लेलुयाह 

यीशु मसीह का जी उठने का उद्वेष्य क्या है और यीषु मसीह का जी उठना उद्वेष्य क्या दर्षाता है

---यीशु  मसीह का जी उठना सबुत है कि परमेष्वर ने मसीह यीषु का बलिदान पापो के लिए स्वीकार किया है

---यीशु  मसीह का जी उठना हमे यह साबित करता है कि मरने के बाद एक जीवन है युहन्ना 11ः25-26

---यीशु  मसीह का जी उठना दर्षाता है यीशु जीवित है और आज वह हमारे लिए पिता से  निवेदन करता है रोमियो 8ः34

---जो भविष्यवाणी उसके प्रति था वह पुरा हो भजनसहिंता 16ः9-11

----यह उस समय के लोगो के लिए चिन्ह दिया गया कि वे विश्वास  करे मति 12ः38-40.

----यीशु मसीह का जी उठने के द्वारा सभी उन लोगो प्रोत्साहन दिया गया है जो उस पर विष्वास करते है कि हमारा उद्वारकर्ता जीवित है,

---यीशु मसीह का जी उठना सभी विष्वासियो को याद दिलाता है कि जो मसीह मे मर गए है हम उनके लिए निराषा और दुखी ना रहे जैसे यीषु मसीह मर कर दुबारा जी उठा वैसे ही वे भी जी उठेगे जो मसीह मे सो गऐ है 1थिस्सुुलुनिकियो 4ः13-14,

----यीशु मसीह का जी उठना यह मसीहो के विष्वास का आधार है 1कुरिन्थियो 15ः13-14,

----यीशु मसीह का जी उठना यह दर्षाता है विष्वासियो के पास अब सामर्थ है वे कमजोर नही है


2. यीशु  मसीह के जी उठने का लाभ

इफिसियो 2ः1-9,

यीशु  मसीह के जी उठने के द्वारा बहुत से लाभो का हम आन्नद प्राप्त करते है, े 

1. पापो से छुटकारा और उद्वार ----प्रेरितो के काम 17ः30-31,4ः12,

2. जीवन कि शुद्धता  और पवित्रकरण ---इब्रानियो 13ः12,इब्रानियो 12ः14,परमेष्वर का स्वभाव पवित्रता का है,जिसे आदम और हवा ने पाप के कारण खो दिया था उसे वह यीशु  मसीह के मरने और जीवन उठने के द्वारा सभी विष्वासी प्राप्त करते है,

3. मृत्यु,अन्धकार के सभी सामर्थ पर अधिकार और चंगाई कुलुस्सियो 1ः12-14,

4. पवित्र आत्मा का सामर्थ ---- प्रेरितो के काम 1ः8,2ः1-4,कुछ लोग पुछते है कैसे हम इन सभी आषिड्ढो का लाभ प्राप्त कर सकते है

5. अन्नत जीवन कि आषा----

आपको याद रखना है

आपका प्रभु जीवित है - विश्वास  करे

आपका प्रभु जीवित है -- उस पर निभर रहे

आपका प्रभु जीवित है -- आन्नद करे

आपका प्रभु जीवित है --आराम करे,क्योकि वह आपकी समस्याओ को दुर कर सकता है


3.यीशु  के जी उठने के द्वारा सामर्थ ओर विजय का आन्नद प्राप्त करना

कैसे आप यीशु के जी उठने के द्वारा सामर्थ और विजय का आन्नद अपने जीवन मे प्राप्त कर सकते है आपको उस सामर्थ और आन्नद के लिए कुछ करना होगा,

1. आपको वास्तविकता से प्रभु यीषु मसीह का मित्र बनना होगा,पाप को छोडना होगा

2. आपको हमेशा पवित्र जीवन जीना होगा,पवित्र मन,पवित्र जीवन,

इसलिए किसी ने कहा 

watch your thoughts it can become your Action

watch your action it can become your habit

watch your habit it can become your character

watch your character it can become your Life 

इसलिए आप क्या सोचते है ध्यान रखे,

3. आपको सभी बुराई और बुरे लोगो से दुर रहना होगा

4. आपको लगातार पेमेश्वर  के वचन का अध्ययन करना होगा

5. आपको प्रार्थना का जीवन जीना होगा

6. आपको परमेष्वर के प्रतिज्ञा पर विश्वास  करना होगा,

7. आपको परमेष्वर के महिमा करना होगा और दुसरो को प्रभु यीशु मसीह के प्रेम को बताना होगा,

 

 आईये हम अपने स्थानो मे खडे हो जाऐ और प्रार्थना मे आये,और प्रार्थना करे कि वह जी उठने कि सामर्थ आपके पास आये,वह जी उठने का अधिकार आपके पास आये,


Thursday, June 6, 2024

परमेश्वर के अगुवाही में जीवन जीना --- A Life Guided by God


परमेश्वर के  अगुवाही में जीवन जीना

भजनसहिंता 37:23,

आज बहुत से लोग सोचते है कि उनके जीवन का भाग्य उनके हाथो में हैं और वह यह सोचता है कि उसे अपने जीवन को सावधानी से चलाने कि आवश्यकता है,और उसके द्वारा वह फलदायी जीवन जी सकता है, लेकिन हम यह जानें की हम जीवन में सफलता पाने के लिए हमें परमेश्वर की अगुवाही  आवश्यकता है,

जैसे एक खिलाडी को कोच की  आवश्यकता है जैसे एक विधार्थी को अध्यापक की  आवश्यकता है, जैसे एक चेले को गुरू की आवश्यकता है वैसे ही एक सच्चे जन को परमेश्वर  की अगुवाही की  आवश्यकता है,क्योकि जो कोई परमेश्वर की अगुवाही में चलेगा वह अपने जीवन में सफलता पाएगा, क्योकि बिना परमेश्वर के अगुवाही में चलना खतरनाक बन जाता है, यिर्मयाह 10:23, नीतिवचन 14:12,

इसलिए आज के विषय को कुछ भागों में  बाटेगे,

1. परमेश्वर  के अगुवाही पाए हुऐ लोग,

ऐसे कौन कौन से लोग थे जिन्होने परमेश्वर की अगुवाही पाई,

1. अब्राहम,  2. इसाहक,  3 याकूब,  4. तीन ज्योतिषी लोग, 5. मरीयम का पति युसूफ, 6. दाऊद, 7. यहोशापात। ........ अन्य लोग  

 

2. परमेश्वर की प्रतिज्ञा अगुवाही के लिए 

परमेश्वर ने अपने वचन में बहुत जगह अपने लोगो को और अपने खोजियो को  प्रतिज्ञा दिया है कि वह अपने लोगो कि अगुवाही करेगे,भजनसहिंता 32:8,भजनसंहिता 32:8,यशायाह 48:17,

 

3. परमेश्वर की अगुवाही चलने की आज्ञा

नीतिवचन 2:20,नीतिवचन 4:14

 

4. परमेश्वर की अगुवाही पाने के नियम 

हमे परमेश्वर की अगुवाही  पाने के लिए क्या करना होगा,

हमे खराई से चलना होगा, २शमूएल 22:33,

हमे नम्रता के साथ उसके संग चलना होगा, भजनसंहिता 25:9,

हमे परमेश्वर का भय मानना होगा, भजनसंहिता 26:3

हमे परमेश्वर का वचन पढना चाहिए,यहोशु 1:8,

हमे परमेश्वर के अगुवाही के लिए प्रार्थना करना चाहिए,जैसे एज्रा, नहेम्याह, और दाऊद ने पाया, भजनसहिंता 25:4,23:3, भजनसंहिता 27:11

हमे परमेश्वर के आराधना करना चाहिए,जैसे एलिषा ने किया,2राजा 3:13-15

हमे परमेश्वर के उपस्थिति में आना चाहिए सगंति मंे लगातार आना चाहिए,जैसे अब्राहम ने पाया, उत्पति 18:16-20

 

5. परमेश्वर की अगुवाही में  ना चलने के खतरे,

मिर्ययाह 10:23, नीतिवचन 14:12, 16:25,नीतिवचन 15:10

दाऊद जब परमेश्वर की अगुवाही में ना चला तो वह खतरे में गया,

जब उज्जिय्याह परमेश्वर की अगुवाही  में ना चला तो वह खतरे में गया, 2 इतिहास 26 :16 

सिमसोन  जब परमेश्वर की अगुवाही में ना चला तो वह खतरे में गया,

सफिरा और हन्नियाह जब परमेश्वर की अगुवाही में नही चला तो वह खतरे में गए,

ऐसे बहुत से लोग है जब उन्होने परमेश्वर की अगुवाही में नही चले तो उनके जीवन में बहुत बडी बडी पेरशानिया आई,मेरी प्रार्थना है आप प्रभु के अगुवाही यीशु के नाम से आमीन और आमीन,

 

6. परमेश्वर के अगुवाही पर चलने के लाभ और आशीषें 

क्या लाभ होगा जब कोई परमेश्वर की अगुवाही में चले,

1.       प्रभु उसके सभी शत्रुओ  को दबा देगा, भजनसिहंता 81:13-14,

2.       प्रभु उसकी आयु बढाएगा, 1राजा 3:14,

3.       प्रभु उसे पृथ्वी का अधिकारी बना देगा, भजनसंहिता 37:35, और ऐसे बहुत सी आशीष को पायेगा। 

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A Life Guided by God

Psalm 37:23,

Today many people think that the fate of their life is in their hands and they think that they need to lead their life carefully, and by that they can live a fruitful life, but we should know that to get success in life we ​​need the leadership of God,

Just like a player needs a coach, just like a student needs a teacher, just like a disciple needs a Guru, similarly a true person needs the leadership of God, because whoever walks under the leadership of God will get success in his life, because walking without the leadership of God becomes dangerous, Jeremiah 10:23, Proverbs 14:12,

So today's topic will be divided into some parts,

 

1. People who Guided by God,

Who were the people who got the leadership of God,

1. Abraham, 2. Isaac, 3. Jacob, 4. Three astrologers, 5. Joseph, husband of Mary, 6. David, 7. Jehoshaphat. ........ others

 

2. God's promise for His ​ ​Guidance

God has promised many places in His Word to His people and those who seek Him that He will lead His people, Psalm 32:8, Isaiah 48:17,

 

3. God's command to Guide

Proverbs 2:20, Proverbs 4:14

 

4. Principal for Receiving God's ​Guidance

How can we received God’s ​guidance in our life

 We must walk in integrity, 2 Samuel 22:33,

We must walk with Him in humility, Psalm 25:9,

We must fear God, Psalm 26:3

We must read God's Word, Joshua 1:8,

We must pray for God's ​guidance, such as Ezra, Nehemiah, and David found out, Psalm 25:4, 23:3, Psalm 27:11

We must worship God, as Elisha did, 2 Kings 3:13-15

We must come into God's presence and frequent fellowship, as Abraham found, Genesis 18:16-20

 

5. The dangers of not following God's ​guidance

 Jer 10:23, Proverbs 14:12, 16:25, Proverbs 15:10

 

David was in danger when he did not follow God's ​guidance.

Uzziah was in danger when he did not follow God's ​guidance. 2 Chronicles 26:16

Simson was in danger when he did not follow God's ​guidance.

Zephirah and Ananias were in danger when they did not follow God's ​guidance.

Many people like this When they did not follow God's ​guidance. they faced a lot of problems in their lives. I pray that you follow God's ​guidance every time in Jesus Name I Pray Amen and Amen

 

6. Benefits and Blessings of Following God's ​guidance

What are the benefits when someone follows God's leading,

1. The Lord will suppress all his enemies, Psalm 81:13-14,

2. The Lord will extend his life, 1 Kings 3:14,

3. The Lord will make him inheritor of the earth, Psalm 37:35, and he will receive many such blessings.

 

यीशु मसीह के पुनरूत्थान के द्वारा विजय और सामर्थ

  यीशु  मसीह के पुनरूत्थान के द्वारा विजय और सामर्थ 1कुरिन्थियो 15ः1-7, यीशु  मसीह का पुनरूत्थान बाईबल कि सच्ची घटना है,चाहे लोग विष्वास करे...